जानें क्या है 'जैविक खाद जीवामृत, घन जीवामृत, तथा बीजामृत' एवं इनके उपयोग व बनाने की विधियाँ

1.जीवामृत-
जीवामृत एक तरल प्राकृतिक उर्वरक है। यह पौधों की वृद्धि एवं विकास के साथ मिट्टी की संरचना सुधारने में मदद करता है। यह पौधों की रोगाणुओं से सुरक्षा प्रदान करता है, तथा पौधों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

सामग्री-
पानी-180 Liter
ताजा गोबर(देसी गाय का)-10kg
गोमूत्र-5-10 Litre
बेसन-1-1.5kg
गुड़-1-1.5kg
मिट्टी (पीपल / तालाब के नीचे की मिट्टी)-1मुट्ठी(100g)

बनाने की विधि-
सर्वप्रथम एक 200 लीटर का ड्रम लेते हैं, उसमें 180 लीटर पानी डालते हैं, तत्पश्चात उसमें 10kg ताजे देसी गाय का गोबर डालकर मिलाते हैं, तत्पश्चात उसमें गोमूत्र बेसन गुड मिट्टी डाल कर घड़ी की सुई की दिशा में चलाते हैं। इसके बाद मिश्रण को जूट की बोरी से ढक कर 72 घंटे के लिए छोड़ देते हैं। प्रतिदिन सुबह शाम 5 से 10 मिनट मिश्रण को घड़ी की दिशा में चलाते हैं। 72 घंटे में मिश्रण तैयार हो जाता है।

प्रयोग की विधि-
1 एकड़ खेत के लिए 21 लीटर जीवामृत घोल को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। एक फसल में 21 दिन के अंतराल पर 3-4 बार जीवामृत का प्रयोग कर सकते हैं। इसका प्रयोग 7 दिन के अंदर ही करे।


2. घन जीवामृत-
यह एक अत्यंत प्रभावशाली सुखी जैविक खाद है, इसे बुवाई के समय या खेत में पानी देने के 3 दिन बाद भी डाल सकते हैं। इसका प्रयोग रासायनिक उर्वरकों की जगह पर पौधों में पोषक तत्वों की प्राप्ति एवं मिट्टी की संरचना में सुधार के लिए किया जाता है।

सामग्री-
गोबर-100-150kg
गोमूत्र-4-5 litre
बेसन-1kg
गुड़-1kg
मिट्टी-100g

बनाने की विधि-
सर्वप्रथम देसी गाय का ताजा गोबर लेते हैं, इसे छांव में सुखा लेते हैं 7 से 10 दिन बाद जब गोबर सूख जाए तो इसमें से 100 kg गोबर लेकर छांव में फैलाते हैं, तत्पश्चात 1 kg बेसन तथा एक मुट्ठी मिट्टी का इसके ऊपर छिड़काव करते हैं। इसके बाद 1kg गुड़ को देसी गाय के गोमूत्र में घोलकर गोबर पर छिड़काव करते हैं तत्पश्चात मिश्रण को  अच्छी तरह मिला लेते हैं। 4-5 दिन तक इसे यूं ही रहने दे, इसके बाद इसे कूट कर बारीक करके रख लें।

प्रयोग की विधि-
 एक क्विंटल घन जीवामृत 1 एकड़ खेत में एक से दो बार एक फसल में डालें। गेहूं की फसल में 2 क्विंटल तक घन जीवामृत का प्रयोग कर सकते हैं। इसका प्रयोग 6 महीने तक किया जा सकता है।

3. बीजा मृत-
बीजा मृत का प्रयोग बीज उपचार के लिए किया जाता है। इससे पौधों को बीज जनित एवं मृदाजनित बीमारी से बचाया जा सकता है।बीज उपचार से बीज की अंकुरण क्षमता बढ़ जाती है। बीज जल्दी और ज्यादा मात्रा में उगते हैं।

सामग्री-100kg बीज के लिए
पानी-20लीटर
गोमूत्र-5लीटर
ताजा गोबर-5kg
चूना-50g
खाने का सोडा-50g
मिट्टी-100g

बनाने की विधि-
सभी मिश्रण को किसी बर्तन में रख कर मिला लें। मिलाने के बाद सूती कपड़े से ढक कर इसे 24 घंटे के लिए छोड़ दें। 24 घंटे बाद इसका प्रयोग करें।

प्रयोग की विधि-
बीज को छायादार जगह में फैला कर उस पर बीजामृत का छिड़काव करें। छिड़काव के बाद इसे हल्के हाथों से बीज में मिलाएं। बीज को कुछ देर के लिए सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद बुवाई के लिए प्रयोग करें। बुवाई से 24 घंटे पूर्व बीज शोधन करना चाहिए।

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