भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल "नैनो यूरिया" : एक बोरी खाद की जगह सिर्फ आधे लीटर लिक्विड से चल जाएगा काम।


नैनो यूरिया क्या है?

'नैनो यूरिया' नैनो कण के रूप में यूरिया का एक रूप है, जिसमें कणों का आकार 20 से 50 नैनोमीटर होता है। यूरिया एक रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरक है, जो सफेद रंग का होता है। कृत्रिम रूप से यह पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करता है, जो पौधों के लिए प्रमुख पोषक तत्व है। 'नैनो यूरिया' नैनो तकनीक से बना लिक्विड रूप में होता है, इसमें यूरिया की मात्रा वजन का 4 % अर्थात 40000 mg प्रति लीटर नाइट्रोजन होता है। किसान भाई वर्षों से पारंपरिक दानेदार यूरिया का प्रयोग करते हैं, उसी के विकल्प के रूप में अपने देश में ही इफको द्वारा निर्मित नैनो यूरिया, यूरिया का एक बहुत ही बढ़िया विकल्प है। नैनो यूरिया की प्रभावशीलता 85% से 90% तक होती है जबकि पारंपरिक यूरिया की प्रभावशीलता 30 से 40% तक ही होती है। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड इफको ने अगस्त 2021 में देश का पहला लिक्विड नैनो संयंत्र चालू किया था। इसका उद्देश्य पारंपरिक यूरिया के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग को कम करना है तथा मृदा जल एवं वायु प्रदूषण को कम करना है। इफको के अनुसार नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव पारंपरिक यूरिया की एक बोरी के बराबर हो सकता है।

नैनो यूरिया कैसे काम करता है?

नैनो यूरिया का छिड़काव सीधे पत्तों पर किया जाता है, जिसे पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है । यह पतियों के एपिडर्मिस पर पाए जाने वाले रंध्र एवं छिद्रों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। नैनो यूरिया की सेल्फ लाइफ 1 साल होती है। नैनो यूरिया के प्रयोग से फसल बहुत ही संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन लेकर के अपना जीवन चक्र पूरा करती है। अतः पौधे नाजुक के बजाय मजबूत बनते है, फसल को सूखा वाली स्थिति में भी ज्यादा नुकसान नहीं होता है, तेज हवा में फसल गिरने से काफी हद तक बस जाती है, ज्यादा तापमान होने पर भी फूल लगते है,और फूल से फल भी बनते है।आपके फसल में पारंपरिक यूरिया की अपेक्षा अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन मिलता है। तुड़ाई के बाद बिना सड़े गले कई दिनों तक बाजार में बिक्री के लिए सामान्य तापमान पर ही फसल को संरक्षित रखा जा सकता है नैनो यूरिया से उत्पादित फसल को बाजार में अधिक भाव मिलते हैं।

नैनो यूरिया के फायदे

  1. यह प्रभावी रूप से फसल के नाइट्रोजन की आवश्यकता को पूरा करता है, पत्ती प्रकाश संश्लेषण, रूट बायोमास प्रभावी ट्रिलर्स और शाखाओं को बढ़ाता है।
  2. उच्च दक्षता के कारण यह पारंपरिक यूरिया की आवश्यकता को 50% या उससे अधिक तक कम कर सकता है।
  3. नैनो यूरिया की एक बोतल 500ml को ट्रांसपोर्टेशन एवं स्टोर करने में आसानी होती है।
  4. नैनो यूरिया मनुष्य, पशु पक्षी, मित्र कीट और परिवेश के लिए भी सुरक्षित होता है।
  5. इसके प्रयोग से बेहतर पोषण गुणवत्ता के साथ उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
  6. नमी के संपर्क में आने पर किसानों को केकिंग की चिंता नहीं होती है।
  7. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग में कमी।
  8. यह मिट्टी, वायु और जल की गुणवत्ता को संरक्षित करने में मदद करता है।
  9. किसानों के लिए सस्ता  किसानों की आय बढ़ाने में कारगर है।

नैनो यूरिया का प्रयोग क्यों करें?

किसान भाइयों आपको पता होना चाहिए कि पूरे विश्व में सबसे सस्ता यूरिया हमारे भारत में मिलता है, मात्र ₹270 में एक बोरी, लेकिन क्या आपको पता है इसकी वास्तविक कीमत क्या है। भारत सरकार विदेश से आने वाली एक बोरी यूरिया पर रू3000 से लेकर 4000 तक खर्च करती है। इस तरह से एक बोरी यूरिया पर रू2500 से 4000 तक अनुदान भारत सरकार को विदेशी मुद्रा के रूप में देना पड़ता है। मतलब एक सरल भाषा में समझे तो एक सबसे छोटा किसान जो वर्ष में 5 बोरी यूरिया का प्रयोग करता है, और भारत सरकार की लगभग ₹20000 की राशि यूरिया पर अनुदान के रूप में खर्च करवाता है। पूरे भारत में करोड़ों रुपए भारत सरकार को उर्वरक के अनुदान के रूप में विदेशों में देना पड़ता है।
नैनो यूरिया 500ml मात्र ₹240 में प्राप्त होती है, जिसका छिड़काव 1 एकड़ क्षेत्र में करने पर 23 किलो के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होता है, जबकि एक बोरी यूरिया का मूल्य ₹270 है। इस प्रकार प्रति बोरी 25 से ₹30 की बचत होगी। यदि किसान भाई अपने उपयोग का आधा हिस्सा भी पारंपरिक यूरिया की जगह स्वदेश निर्मित नैनो यूरिया का प्रयोग करें, तो वह अपने बचत के साथ-साथ अपने देश कि विदेश को भेजी जाने वाली बहुत बड़ी अनुदान की राशि बचा कर देश के विकास में अपना योगदान दे सकते है।

नैनो यूरिया का प्रयोग कैसे करें?


नैनो यूरिया का प्रयोग बहुत ही सरल है, क्योंकि यह 100% पत्तियों से अवशोषित होने वाली खाद है। अतः जब फसल में पूरी तरह से पत्तियां आ जाए और जमीन लगभग ना के बराबर दिखाई पड़े तब नैनो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। वैज्ञानिक के अनुसार नाइट्रोजन की आधी मात्रा फसल की शुरुआत की अवस्था में पारंपरिक दानेदार यूरिया से एवं बाकी आधी मात्रा नैनो यूरिया के माध्यम से खड़ी फसल में दी जानी चाहिए।
नैनो यूरिया के प्रयोग से पहले बोतल को अच्छी तरह से हिला कर 4ml नैनो यूरिया प्रति लीटर पानी की दर से यानी  एक 15 लीटर क्षमता वाली स्प्रेयर मशीन में 60 ml ( नैनो यूरिया की एक बोतल में लगी ढक्कन से तीन ढक्कन) प्रयोग करें। किसान भाई बेहतर परिणाम के लिए नैनो यूरिया के साथ इफको की सागरिका तरल प्रति लीटर पानी में 2.5 से 3ml एवं जल विलेय उर्वरक जैसे एनपीके (18:18:18) 10 से 15 ग्राम, पानी में अच्छी तरह से मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं।

पारंपरिक दानेदार यूरिया के दुष्प्रभाव


पारंपरिक दानेदार यूरिया बहुत ही सस्ती दर पर मिलता है, इसलिए किसान भाई इसका अपने खेतों में अत्यधिक एवं अनावश्यक प्रयोग करते है। किसान भाइयों को ऐसा लगता है की अत्यधिक यूरिया के प्रयोग से हमारी फसल अच्छी होगी एवं उत्पादन अधिक होगा। जबकि इसका परिणाम यह होता है, कि फसल बहुत ही नरम हो जाती है, एवं थोड़ी सी हवा चलने पर गिर जाती है। फसलों के नरम होने के कारण ज्यादा कीड़े मकोड़े एवं बीमारियों का अटैक होता है। फसल से प्राप्त उत्पादों की भंडारण क्षमता कम हो जाती है और वह तुड़ाई के बाद बहुत ही कम अवधि में सड़ने लगती है। यदि गुणवत्ता की बात की जाए तो अत्यधिक यूरिया के प्रयोग से फसल के उत्पाद का जो सही स्वाद होना चाहिए वह नहीं मिल पाता है। आप देखते होंगे, आजकल बाजार में सुंदर-सुंदर सब्जियां,फल इत्यादि मिलते है, लेकिन उनमें कोई स्वाद नहीं होता, इसका एकमात्र कारण है यूरिया का अधिक प्रयोग और जब हम ऐसे फलों एवं सब्जियों का सेवन करते हैं तो वह हमारे लिए शुगर, बीपी, कैंसर जैसी अनेक बीमारियों का कारण बनती है।
मनुष्य स्वास्थ्य के अलावा पर्यावरण पर भी इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है। जब हम दानेदार यूरिया का प्रयोग करते है, तो उसका मात्र 30% मात्रा ही पौधों द्वारा अवशोषित की जाती है, बाकी मात्रा भूमि जल अथवा वातावरण में मिल जाती है। फल स्वरूप भूमि ,जल प्रदूषण के साथ-साथ वातावरण भी प्रदूषित हो जाता है।




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