बकरी की 7 सबसे अधिक मुनाफा देने वाली भारतीय नस्लें।



'बकरी पालन' एक कम लागत एवं ज्यादा मुनाफा वाला व्यवसाय है। इस वजह से यह व्यवसाय हमारे देश में तेजी से बढ़ रहा है। बकरी पालन किसानों की आय का मुख्य जरिया बनता जा रहा है। दूसरे मवेशियों की तुलना में इसमें नुकसान होने की संभावना कम होती है। बकरी पालक बकरी की अच्छी नस्लों का चयन करके अपना मुनाफा और भी बढ़ा सकते हैं। वैसे तो बकरी की कई नस्लें है, परंतु पशुपालक को अपने क्षेत्र के हिसाब से नस्ल का चयन करना चाहिए, जो उनके क्षेत्र के लिए अनुकूल हो।

बकरी की मुख्य नस्लें


1. ब्लैक बंगाल


क्षेत्र - बकरी की यह नस्ल मुख्यत: बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मेघालय व असम राज्यों में पाई जाती है।
पहचान

  • यह बकरी छोटे कद परंतु गठीला शरीर वाली होती है, इनके शरीर पर छोटे तथा चमकीले बाल होते हैं। 
  • इसका रंग सामान्यत: काला होता है, परंतु यह हल्के लाल, भूरे या सफेद रंग की भी हो सकती है।
  •  इनके सिंग छोटे और पैर कम लंबे होते हैं। यह एक अच्छी जनन क्षमता वाली मांस उत्पादक नस्ल है।
  •  इनके नर एवं मादा दोनों में दाढ़ी होते है।इसका शारीरिक वजन नर 25-30kg, एवं मादा 20-25kg होता है।

विशेषता 

  • छोटा शरीर होने के कारण आहार, जगह तथा पूंजी कि कम आवश्यकता होती है।
  • एक बार में दो से तीन बच्चे देने एवं जल्दी बच्चे देने की क्षमता होती है।
  •  (2 वर्ष में कम से कम तीन बार)किसी भी वातावरण में जल्द अनुकूल हो जाती है।
  • बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है।
  • अत्यंत उत्तम गुणवत्ता के मांस तथा चमड़े पाए जाते है।

2. जमुनापारी

क्षेत्र - यह नस्लें उत्तर प्रदेश के मथुरा, इटावा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है।

पहचान 
  • यह बड़े आकार की बकरी है।
  • इसका रंग सफेद एवं गले व सिर पर धब्बे भी पाए जाते हैं।
  • इसकी मुख्य पहचान इसकी नाक होती है, जो उभरी हुई होती है, जिसे रोमन रोज कहते हैं।
  • इसके कान लंबे तथा लटके होते हैं।
  • इसका शारीरिक वजन, नर - 50-60kg एवं मादा 40-50kg

विशेषता 

  • यह दूध और मांस दोनों के लिए उपयोगी है।
  • यह तेजी से बढ़ता है और अधिक दूध देने की क्षमता होती है।
  • दुग्ध उत्पादन- दुग्ध काल (194 दिन) में 200 लीटर
  • इसके बकरे 2 साल में मांस लेने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसका वजन ज्यादा होता है।
  • अन्य नस्लों की अपेक्षा इसमें बीमारियां कम होती है।

3. सिरोही

क्षेत्र - इसका प्राकृतिक वास राजस्थान के सिरोही, अजमेर, बांसवाड़ा, राजसमंद और उदयपुर के क्षेत्रों में है।

पहचान 
  •  यह मध्यम ऊंचाई की बकरी होती है।
  • इसका रंग भूरा होता है, रीढ़ पर हल्के सफेद व भूरे धब्बे होते हैं।
  • इसके कान चपटे तथा नीचे की ओर लटके हुए पतानुमा आकार के होते हैं।
  • परिपक्व होने पर इसके गर्दन में हल्का घुमाव एवं पीठ में दबाव आ जाता है।
विशेषता 
  • यह दूध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त है।
  • यह 14-16 महीने में दो बार बच्चे देती है, सामान्यत: एक बार में दो बच्चे देती है। बच्चे का वजन 2-3 kg तक हो सकता है।
  • यह 18 से 24 महीने में परिपक्व हो जाती है।

4. बारबरी

क्षेत्र - यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के एटा, आगरा, अलीगढ़ व मथुरा जिले में पाई जाती है।

पहचान 
  •  यह छोटे आकार की गठीले शरीर वाली बकरी है।
  • इसका रंग सफेद तथा शरीर पर भूरे रंग का धब्बा पाया जाता है।
  • इसके कान छोटे एवं सीधे होते है तथा इसके पूंछ पीछे की ओर मुड़े होते है।
  • शारीरिक वजन नर - 37kg, मादा - 22 kg
विशेषता 
  •  यह दूध तथा मांस दोनों के लिए उपयोगी है।
  • इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह कम उम्र (9-10माह) में परिपक्व हो जाती है।
  • इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।
  • दुग्ध उत्पादन पूर्ण दुग्ध काल में 95kg तक होता है।

5. बीटल

क्षेत्र - यह पंजाब के गुरदासपुर,अमृतसर, फिरोजपुर जिलों में पाई जाती है।

पहचान 
  •  यह नस्ल जमुनापारी से मिलता जुलता है। यह अपनी ऊंचाई एवं लंबाई के लिए जानी जाती है।
  • यह मुख्यत: काले,भूरे, सफेद एवं काले रंग में सफेद धब्बों के साथ पाई जाती है।
  • बीटल बकरी की पहचान इसकी रोमन नाक, लंबे लटकते हुए कान तथा लंबे पैर है।
  • शारीरिक वजन नर-60-65kg, मादा-40-45kg
विशेषता 
  • यह दूध तथा मांस दोनों के लिए उपयोगी है।
  • 12 से 18 महीने के बीच पहली बार बच्चे को जन्म देती है।
  • इसका शारीरिक विकास तेजी से होता है।
  • यह आसानी से किसी भी वातावरण में ढल जाती है।
  • इसकी दुग्ध उत्पादन क्षमता पूर्ण दुग्ध काल में 150-200 लीटर (प्रतिदिन 2 से ढाई लीटर लीटर) तक होती है।

6. उस्मानाबादी

क्षेत्र - यह नस्ल महाराष्ट्र के उस्मानाबाद, परभणी, अहमदनगर और सोलपुर जिले में पाई जाती है।

पहचान 
  •  यह आकार में बड़ी सामान्यता काले रंग की एवं शरीर पर भूरे या सफेद धब्बे होते है।
  • शारीरिक वजन नर- 34kg, मादा- 32kg

विशेषता 
  •  यह दूध और मांस दोनों के लिए उपयुक्त होती है। मुख्य रूप से इसे मांस के लिए पाला जाता है, दुग्ध उत्पादन कम होता है।
  • यह बकरी सामान्यता साल में दो बार बच्चे देती है। एक साथ दो से तीन बच्चे देती है।

7. तोतापरी

क्षेत्र - यह नस्ल मुख्य रूप से राजस्थान में पाई जाती है।

पहचान 
  •  यह आकार में मध्यम से बड़ी होती है।
  • यह सामान्यत: सफेद और भूरे रंग की होती है।
  • इसकी नाक तोते की तरह उठी हुई होती है एवं कान लटके हुए होते हैं।
  • इसके पूंछ छोटे एवं सिंग छोटे आकार के नुकीले एवं पीछे की ओर मुड़े होते हैं।
  • शारीरिक वजन नर-40-70 kg, मादा-35-55kg 

विशेषता 

  •  यह अपना संतुलन बनाए रखने के लिए जानी जाती है। यह अक्सर छोटे पेड़ों पर चढ़ जाती है।
  • यह किसी भी वातावरण एवं जलवायु को आसानी से अपना लेती है।
  • डेढ़ साल में दो बार एवं एक बार में सामान्यत: दो बच्चे देती है।इसके बच्चे का वजन 2-2.5kg तक होता है।
  • संतुलित आहार देने पर यह प्रतिदिन 1-2 लीटर दूध दे सकती है।


Comments

  1. Very nice information...

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  2. Kon si website ki bat kr rhe ho tum jiska koi existence hi nhi h uska content koi kya copy krega. Aur pehle jail ki spelling to sahi se likh lo TB jail bhijwana ok.

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