पशुओं को नमक ईट ( मिनरल ब्लॉक) देने के चमत्कारी फायदे।

जब हरे चारे की कमी होती है, अधिकतर पशुओं को सूखे चारे और भूसे पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे चारे में नाइट्रोजन एवं अन्य पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है। ऐसे समय में नमक ईट पशुओं के लिए एक पूरक आहार का कार्य करता है। नमक ईट विभिन्न सामग्रियों को मिलाकर बनाया जाता है, जिसमें यह तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। नमक ईट को जुगाली करने वाले सभी पशुओं को दिया जा सकता है। आइए जानते हैं नमक ईट कैसे बनाया जाता है और इसे पशुओं को खिलाने के क्या फायदे है।

नमक ईट बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

गेहूं का चोकर - 250g
काली मिट्टी/ मुल्तानी मिट्टी - 250g
मुर्गी का गोबर - 250g
कपास/ तिसी की खली - 150g
नमक -100g
गुड़/ मोलासेस - 100g
चुना - 50g
खनिज मिश्रण - 50g

नमक ईट बनाने की विधि

कपास/ तीसी की खली एवं गुड़ को पीसकर दोनों मिश्रण  को आपस में मिलाते हैं। तीसी की खली प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है जो पशुओं की वृद्धि के लिए आवश्यक है। गुड़ ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है एवं पाचन क्रिया में मदद करता है। इसके बाद इसमें मुल्तानी मिट्टी मिलाते है, यदि मुल्ताानी मिट्टी ना हो तो काली मिट्टी का भी प्रयोग कर सकते है। मिट्टी में कंकड़ पत्थर या कोई भी कचरा नहीं होनी चाहिए। अब इसमें चुना पाउडर को मिलाते है, चुना पाउडर कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है।  चुना पाउडर के जगह पर सीमेंट का भी प्रयोग कर सकते है। इसके बाद इसमें नमक मिलाते है, नमक में सोडियम और क्लोराइड खनिज तत्व पाए जाते है, जो पशु के शरीर में खनिज  संतुलन बनाए रखने का काम करते है। इसकेेे बाद इसमें गेहूं का चोकर मिलाते है, जो कि फाइबर का एक अच्छा स्रोत है।अब इसमें खनिज मिश्रण को मिलाते है,खनिज मिश्रण में सभी प्रकार के खनिज एवं विटामिन पाए जाते है, जो पशुओं के स्वास्थ्य एवं प्रजनन क्षमता में सुधार करता है।अब इसमें मुर्गी के गोबर को थोड़ी देर पानी में भिगोकर ताकि वह मुलायम हो जाए इस मिश्रण में मिलाते है।मुर्गी के गोबर में नाइट्रोजन पाया जाता है, जो रूमेन में उपस्थित बैक्टीरिया के विकास में सहायक होता है। मुर्गी के गोबर के बदले यूरिया का भी प्रयोग कर सकते है। अंत में चुटकी भर पोटैशियम परमेगनेट को पानी में घोलकर इस मिश्रण में मिलाते है, जो इस नमक ईट को फंगस लगने से बचाता है।अब इस मिश्रण को ईट का आकार देकर उसके बीच में छेद करते है ताकि इसे रस्सी से बांधकर पशुओं को खिलाया जा सके। इसे कुछ देर तक सुखाकर पशुओं आहार के रूप में प्रयोग करते है।

नमक ईट खिलाने के फायदे

  • पशुओं को ऊर्जा, विटामिन, खनिज तत्व व अन्य सूक्ष्म तत्व मिलता है।
  • पशुओं की पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
  • दूध की मात्रा व दूध में वसा का प्रतिशत बढ़ाता है।
  • पशुओं की प्रजनन क्रिया को नियमित करने में सहायक होता है।
  • पशुओं की चमड़ी में चमक आती है और चमड़ी मोटी होती है।
  • पशुओं को समय पर गाभिन होने में सहायक होता है।
  • इससे पशुओं की शारीरिक वृद्धि एवं विकास अच्छे से होता है, हरे चारे के अभाव में पशु को कुपोषण के शिकार होने से बचाया जा सकता है।
  • इसका उपयोग हरा चारा की कमी के समय अधिक लाभदायक है।

सावधानियां

  • ये पूरक आहार केवल जुगाली करने वाले पशुओं जैसे - बकरी गाय,भैंस, बैल इत्यादि के लिए है, इसे अन्य पशुओं को ना दे।
  • बड़े जानवरों को प्रतिदिन 500 - 700 ग्राम एवं छोटे जानवरों को प्रतिदिन 70 - 100 ग्राम नमक ईट देनी चाहिए।
  • 3 महीने से कम उम्र के बकरियों मेमनो को ना दें।
  • इसे केवल चाटने के लिए बनाया गया है, अतः इसे चुरा कर के या पानी में घोलकर कभी ना दें।
  • 1 से 2 सप्ताह में बकरी को इसकी आदत डालें।
  • नमक ईट को पानी, गोबर, पेशाब और चारे से बचाए, अन्यथा पशु इसे नहीं खाएंगे।
  • नमक ईट को पशुओं के सामने इस प्रकार रखें कि वह अपनी इच्छानुसार चाट सके।

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